नामीबिया से भारत लाए गए चीतों के गले में लगी है सैटेलाइट कॉलर ID, जानें क्या है यह टेक्नोलॉजी?

हाइलाइट्स

करीब 70 साल बाद भारत की धरती पर चीता की वापसी हुई है.
चीतों पर नजर रखने के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर ID लगाई गई है.
ID की मदद से चीतों की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है.

नई दिल्ली. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 72वें जन्मदिन पर प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से भारत लाए गए 8 चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा. इन चीतों को विशेष मालवाहक विमान से नामीबिया से ग्वालियर एयरबेस लाया गया था. इसके बाद चिनूक हेलीकॉप्टर से कूनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाया गया. इन 8 चीतों में 5 नर और 3 मादा हैं. इन सभी 8 चीतों की 1 महीने तक निगरानी की जाएगी और सबकुछ ठीक रहने पर इन्हें मुख्य वन में छोड़ दिया जाएगा. खास बात यह है कि चीता हमारे देश से दशकों पहले विलुप्त हो चुके हैं. करीब 70 साल बाद भारत की धरती पर चीता की वापसी हुई है. वहीं, इन चीतों पर नजर रखने के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर ID लगाई गई है. इसकी मदद से चीतों की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है.आइए जानते हैं कि क्या है टेक्नोलॉजी और कैसे करती है काम.

दरअसल, जंगल में बाघ, शेर और चीता सहित कई अन्य जानवरों की स्थिति पर नजर रखने के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर ID पहनाई जाती है. इससे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों को इन जानवरों की लोकेश और हर गतिविधियों की जानकारी मिलती रहती है. यही वजह है कि नामीबिया से भारत लाए गए 8 चीतों पर नजर रखने के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर लगाई गई है. साथ ही गले में लगी सैटेलाइट कॉलर ID की मदद से इन चीतों की सेहत का हाल रिकॉर्ड करना आसान हो जाएगा.

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आईडी में GPS लगा होता है
बता दें कि चीतों को पहनाई गई सैटेलाइट कॉलर ID में स्मार्टफोन्स या दूसरे मोबाइल डिवाइसेज की तरह ही GPS चिप लगा होता है. इस चिप की मदद से जानवरों की स्थिति और लोकेशन में होने वाले बदलाव का पता लगा लगाया जाता है. खास बात यह है कि इन GPS टैग्स से ट्रांसमिट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स का पता सैटेलाइट्स आसानी से लगा सकते हैं.

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ID से जानवर तक इलाज या मदद भेजी जा सकती है
जानकारी के मुताबिक, कॉलर ID की मदद से जानवरों की स्वास्थ्य और स्वभाव में होने वाले बदलाव की जानकारी भी मिलती रहती है. कहा जाता है कि कॉलर ID तब और ज्यादा कारगर होती है जब किसी जानवर को जंगल में छोड़ने के बाद दोबारा नहीं पकड़ना हो. केवल उसकी मॉनीटरिंग करनी हो. स्वास्थ्य से जुड़े डाटा के आधार पर आवश्यकता पड़ने पर ID की सहायता से जानवर तक इलाज या मदद भेजी जा सकती है.

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Sagar Rajbhar
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