सबसे ज्यादा Cyberbullying कर रहें है भारतीय बच्चे, क्या है कारण और कैसे करें बचाव, जानिए सब कुछ

हाइलाइट्स

एक सर्वे के मुताबिक भारत के 45 फीसदी बच्चों ने कहा कि उन्होंने किसी अजनबी को धमकी दी.
McAfee द्वारा किए गए सर्वे में अन्य देशों के 17 प्रतिशत बच्चों ने भी यह ही जवाब दिया.
सर्वे में 48 फीसदी भारतीय बच्चों ने माना कि उन्होंने कभी न कभी अपनी जान-पहचान के व्यक्ति को धमकी दी है.

नई दिल्ली. हाल ही में किए गए एक वैश्विक सर्वे से सामने आया है कि दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले भारत में बच्चे ज्यादा साइबर बुलिंग कर रहे हैं. यह सर्वे अमेरिकी कंप्यूटर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर कंपनी McAfee ने किया था. विशेषज्ञों का कहना है कि जहां साइबर स्पेस में बच्चों को धमकाए जाने की खबरें सुर्खियां बटोरती हैं, वहीं अक्सर इस तरह की रिपोर्ट सामने नहीं आती हैं, जहां बच्चों द्वारा अपने साथियों के साथ बुलिंग की जाती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे और किशोर अक्सर सोचते हैं कि वर्चुअल दुनिया उन्हें पूरी तरह से गुमनामी प्रदान करती है और वे यहां कुछ भी करते हैं, तो उसका कोई परिणाम नहीं होगा. McAfee द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक 45 फीसदी भारतीय बच्चों ने कहा कि उन्होंने कभी न कभी किसी अजनबी को धमकी दी. वहीं अन्य देशों के 17 प्रतिशत बच्चों ने भी यह ही जवाब दिया. साथ ही 48 फीसदी भारतीय बच्चों ने कहा कि उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कभी न कभी बुलिंग की है. वहीं दुनिया भर में अन्य देशों के 21% बच्चों ने भी ऐसा ही किया है.

बच्चे तेजी से अपना रहें हैं इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
McAfee के सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में बच्चे सबसे कम उम्र में मोबाइल मैच्युरिटी के साथ यूज करते हैं. भारत में बच्चे दुनिया भर में सबसे कम उम्र में साइबर बुलिंग सहित ऑनलाइन रिस्क को एक्सीपीरियंस करते हैं. McAfee सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में माता-पिता ने दुनियाभर के पेरेंट्स के मुकाबले इस मुद्दे पर अपने बच्चों से बात करने की सबसे कम सूचना दी. सर्वे के मुताबिक भारत में साइबरबुलिंग की उच्च दर होने का एक कारण स्कूलों और घर पर बच्चों के बीच इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को जल्दी और तेजी से अपनाना हो सकता है.

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घर वालों से कम संवाद
एक्स्पर्ट के मुताबिक बच्चों में डिवाइस अपनाने की उच्च दर और माता-पिता के साथ बातचीत की कम दर के कारण बच्चे बुलिंग करने लगते हैं. दरअसल, इलेट्रोनिक डिवाइस एक ऐसा वातावरण बनाते हैं, जहां भारतीय बच्चे बड़ी मात्रा में ऑनलाइन समय बिताते हैं और वह अपने माता-पिता से कम बात करते हैं या अपनी परेशानी शेयर नहीं करते हैं.

स्थिति से खुद निपटना चाहते हैं बच्चे
विशेषज्ञों का कहना कि बहुत सारे बच्चों के लिए बुलिंग की ओर रुख करना मुद्दों का मुकाबला करने से उपजा है और इसे पावर हासिल करने के तरीके के रूप में भी देखा जाता है. साइबरबुलिंग के शिकार बच्चे अक्सर इस बारे में बात नहीं करते है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि उन्हें अपने दम पर स्थिति को संभालने में सक्षम होना चाहिए.

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कैसे करें साइबर बुलिंग करने वाले बच्चों की पहचान
अगर कोई कोई बच्चा घंटों तक मोबाइल में लग रहता है, या उसने अपनी वॉट्सऐप चैट को डिलीट किया है, तो हो सकता है कि वह बुलिंग कर रहा हो. इसके अलावा अगर किसी बच्चे के सोशल मीडिया पर कई अकाउंट हैं, उसकी डायरी में कई पासवर्ड लिखे हों या उसने ऐप को लॉक कर रखा है, तो संभव है वह बुलींग कर रहा है. साथ ही अगर किसी बच्चे ने मोबाइल पर एनीडेस्क ऐप इंस्टॉल कर रहा, तो इसका मतलब है कि वह बुलिंग कर रहा है.

कैसे करें बुलिंग के शिकार बच्चों की पहचान
अगर आपका बच्चा अचानक सोशल मीडिया छोड़ दे, ऑनलाइन रहने में इंट्रेस्ट न दिखाए या फिर इंटरनेट के बारे में कोई बात न करें, तो ऐसे में संभव है कि वह बुलिंग का शिकार हो. इसके अलावा अगर कोई मैसेज मिलने पर असहज महसूस करता है और बिना पढ़े ही कोई मैसेज डिलीट कर दे या फिर ऑनलाइन गेम खेलने से मना कर देना तो हो सकता है कि आपका बच्चा बुलिगं का शिकार हो.

साइबर बुलिंग से बच्चे को कैसे सुरक्षित रखें
अगर कोई आपकी की पोस्ट पर कोई आपत्तिजनक कमेंट करता है, तो उस पर रिएक्शन देने से बचना चाहिए. अगर आपके के साथ बुलिंग हुई है, तो उसके स्क्रीनशॉट को अपने पास जरूर रखें. साथ ही परेशान करने वाले व्यक्ति को सोशल मीडिया पर तुरंत ब्लॉक कर दें. यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम के सेफ्टी सेंटर पर भी शिकायत करें. इसके अलावा सोशल मीडिया सेटिंग्स चेक करें. अगर सेटिंग्स में कोई लूपहोल्स है, तो उसे दूर करें. बुलिंग बढ़ने पर अपने पेरेंट्स, टीचर्स या दोस्तों को इस बारे में जरूर बताएं.

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Sagar Rajbhar
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