Delhi News : भागवत ने कहा- विश्व बाजार पर सबका ध्यान, विश्व परिवार की बात करने वाला भारत अकेला

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
– फोटो : amar ujala

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि पूरी दुनिया विश्व बाजार की बात करती है लेकिन विश्व परिवार की बात करने वाला भारत अकेला देश है। यही नहीं हम समूचे विश्व को एक कुटुंब बनाने के लिए निरंतर काम भी कर रहे हैं। मोहन भागवत डॉ आम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में संकल्प फाउंडेशन व पूर्व सिविल सेव अधिकारी मांच के व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा, प्राचीन काल से ही भारत विविधता का देश रहा है। हमारी भूमि ऐसी है जो सबको देती है। यह भूमि अन्न और जल के साथ साथ संस्कार भी देती है। इसीलिए इसे हम सब भारत माता कहते हैं। हम इस भूमि के मालिक नहीं है, हम इसके पुत्र हैं। ये हमारी पुण्यभूमि है, कर्मभूमि है। हमारी एकता का सूत्र है संस्कृति और हम इसका प्रत्यक्ष आचरण करते हैं। हमें एक नहीं होना है, हम एक हैं।

हमारे पूर्वजों ने हमें यही सिखाया, बताया है। संस्कृति की सुरक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है, लड़ाइयां लड़ी हैं। भारत, पूर्वज, संस्कृति से है। हम इसे छोड़ेंगे नहीं। भागवत ने कहा, पश्चिमी देशों में नेशन का विकास और हमारे देश में राष्ट्र के विकास का क्रम एकदम अलग है। हमारा नेशनलिज्म नहीं है, न ही राष्ट्रवाद है। हमारी तो राष्ट्रीयता है। 

संकल्प फाउंडेशन व्यावसायिक नहीं सेवाभाव से काम कर रही: नृपेंद्र मिश्र
व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव व श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री नृपेंद्र मिश्र ने कहा, संकल्प फाउंडेशन व्यवसायिक नहीं, सेवाभाव से कार्य कर रही है। 36 वर्ष से संकल्प होनहार व जो विद्यार्थी साधन संपन्न नहीं हैं, उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। उनके कार्य के लिए साधुवाद। उन्होंने कहा, संघ से प्रेरणा व जानकारी मिली है कि सामाजिक जीवन में भिन्न-भिन्न रूप से योगदान दे रहे लोग अलग-अलग कार्यं से जुड़कर देश के लिए काम कर सकते हैं।

‘इंडियन पर्सपेक्टिव’ पुस्तक का विमोचन
व्याख्यानमाला के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संकल्प द्वारा संकलित पुस्तक भारतीय परिप्रेक्ष्य के अंग्रेजी संस्करण ‘इंडियन पर्सपेक्टिव’ का भी लोकार्पण किया। इस पुस्तक में पूर्व के वर्षों में आयोजित व्याख्यानमाला में पधारे वक्ताओं के व्याख्यानों का संकलन किया गया है। इनमें डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, गृहमंत्री अमित शाह, स्वर्गीय सुषमा स्वराज, स्वर्गीय अनिल माधव दवे सहित 12 प्रमुख वक्ताओं के व्याख्यान शामिल हैं। पुस्तक का संपादन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी और समाजसेवी राजेंद्र आर्य ने किया है। पुस्तक को प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि पूरी दुनिया विश्व बाजार की बात करती है लेकिन विश्व परिवार की बात करने वाला भारत अकेला देश है। यही नहीं हम समूचे विश्व को एक कुटुंब बनाने के लिए निरंतर काम भी कर रहे हैं। मोहन भागवत डॉ आम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में संकल्प फाउंडेशन व पूर्व सिविल सेव अधिकारी मांच के व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा, प्राचीन काल से ही भारत विविधता का देश रहा है। हमारी भूमि ऐसी है जो सबको देती है। यह भूमि अन्न और जल के साथ साथ संस्कार भी देती है। इसीलिए इसे हम सब भारत माता कहते हैं। हम इस भूमि के मालिक नहीं है, हम इसके पुत्र हैं। ये हमारी पुण्यभूमि है, कर्मभूमि है। हमारी एकता का सूत्र है संस्कृति और हम इसका प्रत्यक्ष आचरण करते हैं। हमें एक नहीं होना है, हम एक हैं।

हमारे पूर्वजों ने हमें यही सिखाया, बताया है। संस्कृति की सुरक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है, लड़ाइयां लड़ी हैं। भारत, पूर्वज, संस्कृति से है। हम इसे छोड़ेंगे नहीं। भागवत ने कहा, पश्चिमी देशों में नेशन का विकास और हमारे देश में राष्ट्र के विकास का क्रम एकदम अलग है। हमारा नेशनलिज्म नहीं है, न ही राष्ट्रवाद है। हमारी तो राष्ट्रीयता है। 

संकल्प फाउंडेशन व्यावसायिक नहीं सेवाभाव से काम कर रही: नृपेंद्र मिश्र

व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव व श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री नृपेंद्र मिश्र ने कहा, संकल्प फाउंडेशन व्यवसायिक नहीं, सेवाभाव से कार्य कर रही है। 36 वर्ष से संकल्प होनहार व जो विद्यार्थी साधन संपन्न नहीं हैं, उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। उनके कार्य के लिए साधुवाद। उन्होंने कहा, संघ से प्रेरणा व जानकारी मिली है कि सामाजिक जीवन में भिन्न-भिन्न रूप से योगदान दे रहे लोग अलग-अलग कार्यं से जुड़कर देश के लिए काम कर सकते हैं।

‘इंडियन पर्सपेक्टिव’ पुस्तक का विमोचन

व्याख्यानमाला के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संकल्प द्वारा संकलित पुस्तक भारतीय परिप्रेक्ष्य के अंग्रेजी संस्करण ‘इंडियन पर्सपेक्टिव’ का भी लोकार्पण किया। इस पुस्तक में पूर्व के वर्षों में आयोजित व्याख्यानमाला में पधारे वक्ताओं के व्याख्यानों का संकलन किया गया है। इनमें डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, गृहमंत्री अमित शाह, स्वर्गीय सुषमा स्वराज, स्वर्गीय अनिल माधव दवे सहित 12 प्रमुख वक्ताओं के व्याख्यान शामिल हैं। पुस्तक का संपादन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी और समाजसेवी राजेंद्र आर्य ने किया है। पुस्तक को प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

Sagar Rajbhar
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